श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.8.22

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

नमः पङ्कजनाभाय नमः पङ्कजमालिने।

नमः पङ्कजनेत्राय नमस्ते पङ्कजाङ्घ्रये॥ २२

namaḥ paṅkajanābhāya namaḥ paṅkajamāline|

namaḥ paṅkajanetrāya namaste paṅkajāṅghraye|| 22

अर्थ

जिनकी नाभिसे ब्रह्माका जन्मस्थान कमल प्रकट हुआ है, जो सुन्दर कमलोंकी माला धारण करते हैं, जिनके नेत्र कमलके समान विशाल और कोमल हैं, जिनके चरणकमलोंमें कमलका चिह्न है—श्रीकृष्ण! ऐसे आपको मेरा बार-बार नमस्कार है॥ २२॥

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