bhaktiyogavidhānārthaṃ kathaṃ paśyema hi striyaḥ|| 20
अर्थ
आप शुद्ध हृदयवाले विचारशील जीवन्मुक्त परमहंसोंके हृदयमें अपनी प्रेममयी भक्तिका सृजन करनेके लिये अवतीर्ण हुए हैं। फिर हम अल्पबुद्धि स्त्रियाँ आपको कैसे पहचान सकती हैं॥ २०॥
तथा परमहंसानां मुनीनाममलात्मनाम्।
भक्तियोगविधानार्थं कथं पश्येम हि स्त्रियः॥ २०
आप शुद्ध हृदयवाले विचारशील जीवन्मुक्त परमहंसोंके हृदयमें अपनी प्रेममयी भक्तिका सृजन करनेके लिये अवतीर्ण हुए हैं। फिर हम अल्पबुद्धि स्त्रियाँ आपको कैसे पहचान सकती हैं॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.8.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 115) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/8/20/