श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.8.20

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

तथा परमहंसानां मुनीनाममलात्मनाम्।

भक्तियोगविधानार्थं कथं पश्येम हि स्त्रियः॥ २०

tathā paramahaṃsānāṃ munīnāmamalātmanām|

bhaktiyogavidhānārthaṃ kathaṃ paśyema hi striyaḥ|| 20

अर्थ

आप शुद्ध हृदयवाले विचारशील जीवन्मुक्त परमहंसोंके हृदयमें अपनी प्रेममयी भक्तिका सृजन करनेके लिये अवतीर्ण हुए हैं। फिर हम अल्पबुद्धि स्त्रियाँ आपको कैसे पहचान सकती हैं॥ २०॥

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