श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.8.17

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

ब्रह्मतेजोविनिर्मुक्तैरात्मजैः सह कृष्णया।

प्रयाणाभिमुखं कृष्णमिदमाह पृथा सती॥ १७

brahmatejovinirmuktairātmajaiḥ saha kṛṣṇayā|

prayāṇābhimukhaṃ kṛṣṇamidamāha pṛthā satī|| 17

अर्थ

जब भगवान् श्रीकृष्ण जाने लगे, तब ब्रह्मास्त्रकी ज्वालासे मुक्त अपने पुत्रोंके और द्रौपदीके साथ सती कुन्तीने भगवान् श्रीकृष्णकी इस प्रकार स्तुति की॥ १७॥

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