अश्वत्थामाको बलपूर्वक बाँधकर अर्जुनने जब शिविरकी ओर ले जाना चाहा, तब उनसे कमलनयन भगवान् श्रीकृष्णने कुपित होकर कहा—॥ ३४॥✎ 666768
शिबिराय निनीषन्तं दाम्ना बद्ध्वा रिपुं बलात्।
प्राहार्जुनं प्रकुपितो भगवानम्बुजेक्षणः॥ ३४
अश्वत्थामाको बलपूर्वक बाँधकर अर्जुनने जब शिविरकी ओर ले जाना चाहा, तब उनसे कमलनयन भगवान् श्रीकृष्णने कुपित होकर कहा—॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.7.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 110) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/7/34/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)