श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.7.20

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

अथोपस्पृश्य सलिलं संदधे तत्समाहितः।

अजानन्‍नुपसंहारं प्राणकृच्छ्र उपस्थिते॥ २०

athopaspṛśya salilaṃ saṃdadhe tatsamāhitaḥ|

ajānannupasaṃhāraṃ prāṇakṛcchra upasthite|| 20

अर्थ

यद्यपि उसे ब्रह्मास्त्रको लौटानेकी विधि मालूम न थी, फिर भी प्राणसंकट देखकर उसने आचमन किया और ध्यानस्थ होकर ब्रह्मास्त्रका सन्धान किया॥ २०॥

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