श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.7.12

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

परीक्षितोऽथ राजर्षेर्जन्मकर्मविलापनम्।

संस्थां च पाण्डुपुत्राणां वक्ष्ये कृष्णकथोदयम्॥ १२

parīkṣito'tha rājarṣerjanmakarmavilāpanam|

saṃsthāṃ ca pāṇḍuputrāṇāṃ vakṣye kṛṣṇakathodayam|| 12

अर्थ

शौनकजी! अब मैं राजर्षि परीक्षित‍्के जन्म, कर्म और मोक्षकी तथा पाण्डवोंके स्वर्गारोहणकी कथा कहता हूँ; क्योंकि इन्हींसे भगवान् श्रीकृष्णकी अनेकों कथाओंका उदय होता है॥ १२॥

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