उस भगवदर्थ कर्मके मार्गमें भगवान्के आज्ञानुसार आचरण करते हुए लोग बार-बार भगवान् श्रीकृष्णके गुण और नामोंका कीर्तन तथा स्मरण करते हैं॥ ३६॥✎ 505152
कुर्वाणा यत्र कर्माणि भगवच्छिक्षयासकृत्।
गृणन्ति गुणनामानि कृष्णस्यानुस्मरन्ति च॥ ३६
उस भगवदर्थ कर्मके मार्गमें भगवान्के आज्ञानुसार आचरण करते हुए लोग बार-बार भगवान् श्रीकृष्णके गुण और नामोंका कीर्तन तथा स्मरण करते हैं॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.5.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 101) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/5/36/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)