सत्यसंकल्प व्यासजी! पुरुषोत्तम भगवान् श्रीकृष्णके प्रति समस्त कर्मोंको समर्पित कर देना ही संसारके तीनों तापोंकी एकमात्र ओषधि है, यह बात मैंने आपको बतला दी॥ ३२॥✎ 505152
एतत्संसूचितं ब्रह्मंस्तापत्रयचिकित्सितम्।
यदीश्वरे भगवति कर्म ब्रह्मणि भावितम्॥ ३२
सत्यसंकल्प व्यासजी! पुरुषोत्तम भगवान् श्रीकृष्णके प्रति समस्त कर्मोंको समर्पित कर देना ही संसारके तीनों तापोंकी एकमात्र ओषधि है, यह बात मैंने आपको बतला दी॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.5.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 101) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/5/32/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)