॥ श्रीहरिः ॥
पाराशर्य महाभाग भवतः कच्चिदात्मना।
परितुष्यति शारीर आत्मा मानस एव वा॥ २
pārāśarya mahābhāga bhavataḥ kaccidātmanā|
parituṣyati śārīra ātmā mānasa eva vā|| 2
अर्थ
नारदजीने प्रश्न किया—महाभाग व्यासजी! आपके शरीर एवं मन—दोनों ही अपने कर्म एवं चिन्तनसे सन्तुष्ट हैं न? ॥ २॥
पाराशर्य महाभाग भवतः कच्चिदात्मना।
परितुष्यति शारीर आत्मा मानस एव वा॥ २
नारदजीने प्रश्न किया—महाभाग व्यासजी! आपके शरीर एवं मन—दोनों ही अपने कर्म एवं चिन्तनसे सन्तुष्ट हैं न? ॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.5.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 97) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/5/2/