अथर्ववेदमें प्रवीण हुए दरुणनन्दन सुमन्तु मुनि। इतिहास और पुराणोंके स्नातक मेरे पिता रोमहर्षण थे॥ २२॥
अथर्वाङ्गिरसामासीत्सुमन्तुर्दारुणो मुनिः।
इतिहासपुराणानां पिता मे रोमहर्षणः॥ २२
अथर्ववेदमें प्रवीण हुए दरुणनन्दन सुमन्तु मुनि। इतिहास और पुराणोंके स्नातक मेरे पिता रोमहर्षण थे॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.4.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 96) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/4/22/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1880 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): अथर्वाङ्गिगरसा → अथर्वाङ्गिरसा