इस प्रकार भगवान्की प्रेममयी भक्तिसे जब संसारकी समस्त आसक्तियाँ मिट जाती हैं, हृदय आनन्दसे भर जाता है, तब भगवान्के तत्त्वका अनुभव अपने-आप हो जाता है॥ २०॥✎ 27
एवं प्रसन्नमनसो भगवद्भक्तियोगतः।
भगवत्तत्त्वविज्ञानं मुक्तसङ्गस्य जायते॥ २०
इस प्रकार भगवान्की प्रेममयी भक्तिसे जब संसारकी समस्त आसक्तियाँ मिट जाती हैं, हृदय आनन्दसे भर जाता है, तब भगवान्के तत्त्वका अनुभव अपने-आप हो जाता है॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.2.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 86) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/2/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)