तत्त्ववेत्तालोग ज्ञाता और ज्ञेयके भेदसे रहित अखण्ड अद्वितीय सच्चिदानन्दस्वरूप ज्ञानको ही तत्त्व कहते हैं। उसीको कोई ब्रह्म, कोई परमात्मा और कोई भगवान्के नामसे पुकारते हैं॥ ११॥✎ 25
वदन्ति तत्तत्त्वविदस्तत्त्वं यज्ज्ञानमद्वयम्।
ब्रह्मेति परमात्मेति भगवानिति शब्द्यते॥ ११
तत्त्ववेत्तालोग ज्ञाता और ज्ञेयके भेदसे रहित अखण्ड अद्वितीय सच्चिदानन्दस्वरूप ज्ञानको ही तत्त्व कहते हैं। उसीको कोई ब्रह्म, कोई परमात्मा और कोई भगवान्के नामसे पुकारते हैं॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.2.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 85) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/2/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)