श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.19.33

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

येषां संस्मरणात् पुंसां१ सद्यः शुद्ध्यन्ति वै गृहाः।

किं पुनर्दर्शनस्पर्शपादशौचासनादिभिः॥ ३३

yeṣāṃ saṃsmaraṇāt puṃsāṃ sadyaḥ śuddhyanti vai gṛhāḥ|

kiṃ punardarśanasparśapādaśaucāsanādibhiḥ|| 33

अर्थ

आप-जैसे महात्माओंके स्मरणमात्रसे ही गृहस्थोंके घर तत्काल पवित्र हो जाते हैं; फिर दर्शन, स्पर्श, पादप्रक्षालन और आसन-दानादिका सुअवसर मिलनेपर तो कहना ही क्या है॥ ३३॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—पुंसः।

    (मुद्रित पृष्ठ 179)

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