yeṣāṃ saṃsmaraṇāt puṃsāṃ sadyaḥ śuddhyanti vai gṛhāḥ|
kiṃ punardarśanasparśapādaśaucāsanādibhiḥ|| 33
अर्थ
आप-जैसे महात्माओंके स्मरणमात्रसे ही गृहस्थोंके घर तत्काल पवित्र हो जाते हैं; फिर दर्शन, स्पर्श, पादप्रक्षालन और आसन-दानादिका सुअवसर मिलनेपर तो कहना ही क्या है॥ ३३॥
येषां संस्मरणात् पुंसां सद्यः शुद्ध्यन्ति वै गृहाः।
किं पुनर्दर्शनस्पर्शपादशौचासनादिभिः॥ ३३
आप-जैसे महात्माओंके स्मरणमात्रसे ही गृहस्थोंके घर तत्काल पवित्र हो जाते हैं; फिर दर्शन, स्पर्श, पादप्रक्षालन और आसन-दानादिका सुअवसर मिलनेपर तो कहना ही क्या है॥ ३३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.19.33 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 179) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/1/19/33/