श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.15.24

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

प्रायेणैतद् भगवत ईश्‍वरस्य विचेष्टितम्।

मिथो निघ्नन्ति भूतानि भावयन्ति च यन्मिथः॥ २४

prāyeṇaitad bhagavata īśvarasya viceṣṭitam|

mitho nighnanti bhūtāni bhāvayanti ca yanmithaḥ|| 24

अर्थ

वास्तवमें यह सर्वशक्तिमान् भगवान्‌की ही लीला है कि संसारके प्राणी परस्पर एक-दूसरेका पालन-पोषण भी करते हैं और एक-दूसरेको मार भी डालते हैं॥ २४॥✎ 101 102

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #101 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #102 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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