mitho nighnanti bhūtāni bhāvayanti ca yanmithaḥ|| 24
अर्थ
वास्तवमें यह सर्वशक्तिमान् भगवान्की ही लीला है कि संसारके प्राणी परस्पर एक-दूसरेका पालन-पोषण भी करते हैं और एक-दूसरेको मार भी डालते हैं॥ २४॥✎ 101102
प्रायेणैतद् भगवत ईश्वरस्य विचेष्टितम्।
मिथो निघ्नन्ति भूतानि भावयन्ति च यन्मिथः॥ २४
वास्तवमें यह सर्वशक्तिमान् भगवान्की ही लीला है कि संसारके प्राणी परस्पर एक-दूसरेका पालन-पोषण भी करते हैं और एक-दूसरेको मार भी डालते हैं॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.15.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 154) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/15/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)