शोकसे अर्जुनका मुख और हृदय-कमल सूख गया था, चेहरा फीका पड़ गया था। वे उन्हीं भगवान् श्रीकृष्णके ध्यानमें ऐसे डूब रहे थे कि बड़े भाईके प्रश्नोंका कुछ भी उत्तर न दे सके॥ २॥✎ 94
शोकेन शुष्यद्वदनहृत्सरोजो हतप्रभः।
विभुं तमेवानुध्यायन्नाशक्नोत्प्रतिभाषितुम्॥ २
शोकसे अर्जुनका मुख और हृदय-कमल सूख गया था, चेहरा फीका पड़ गया था। वे उन्हीं भगवान् श्रीकृष्णके ध्यानमें ऐसे डूब रहे थे कि बड़े भाईके प्रश्नोंका कुछ भी उत्तर न दे सके॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.15.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 150) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/15/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)