api svitparyabhuṅkthāstvaṃ sambhojyān vṛddhabālakān|
jugupsitaṃ karma kiñcitkṛtavānna yadakṣamam|| 43
अर्थ
अथवा भोजन करानेयोग्य बालक और बूढ़ोंको छोड़कर तुमने अकेले ही तो भोजन नहीं कर लिया? मेरा विश्वास है कि तुमने ऐसा कोई निन्दित काम तो नहीं किया होगा, जो तुम्हारे योग्य न हो॥ ४३॥✎ 1859
अपि स्वित्पर्यभुङ्क्थास्त्वं सम्भोज्यान् वृद्धबालकान्।
जुगुप्सितं कर्म किञ्चित्कृतवान्न यदक्षमम्॥ ४३
अथवा भोजन करानेयोग्य बालक और बूढ़ोंको छोड़कर तुमने अकेले ही तो भोजन नहीं कर लिया? मेरा विश्वास है कि तुमने ऐसा कोई निन्दित काम तो नहीं किया होगा, जो तुम्हारे योग्य न हो॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.14.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 150) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/14/43/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)