॥ श्रीहरिः ॥
प्रद्युम्नः सर्ववृष्णीनां सुखमास्ते महारथः।
गम्भीररयोऽनिरुद्धो वर्धते भगवानुत॥ ३०
pradyumnaḥ sarvavṛṣṇīnāṃ sukhamāste mahārathaḥ|
gambhīrarayo'niruddho vardhate bhagavānuta|| 30
अर्थ
वृष्णिवंशके सर्वश्रेष्ठ महारथी प्रद्युम्न सुखसे तो हैं? युद्धमें बड़ी फुर्ती दिखलानेवाले भगवान् अनिरुद्ध आनन्दसे हैं न?॥ ३०॥
प्रद्युम्नः सर्ववृष्णीनां सुखमास्ते महारथः।
गम्भीररयोऽनिरुद्धो वर्धते भगवानुत॥ ३०
वृष्णिवंशके सर्वश्रेष्ठ महारथी प्रद्युम्न सुखसे तो हैं? युद्धमें बड़ी फुर्ती दिखलानेवाले भगवान् अनिरुद्ध आनन्दसे हैं न?॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.14.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 148) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/14/30/