श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.14.19

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

न पिबन्ति स्तनं वत्सा न दुह्यन्ति च मातरः।

रुदन्त्यश्रुमुखा गावो न हृष्यन्त्यृषभा व्रजे॥ १९

na pibanti stanaṃ vatsā na duhyanti ca mātaraḥ|

rudantyaśrumukhā gāvo na hṛṣyantyṛṣabhā vraje|| 19

अर्थ

बछड़े दूध नहीं पीते, गौएँ दुहने नहीं देतीं, गोशालामें गौएँ आँसू बहा-बहाकर रो रही हैं। बैल भी उदास हो रहे हैं॥ १९॥✎ 93

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #93 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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