भीमसेन! तुम तो मनुष्योंमें व्याघ्रके समान बलवान् हो; देखो तो सही—आकाशमें उल्कापातादि, पृथ्वीमें भूकम्पादि और शरीरोंमें रोगादि कितने भयंकर अपशकुन हो रहे हैं! इनसे इस बातकी सूचना मिलती है कि शीघ्र ही हमारी बुद्धिको मोहमें डालनेवाला कोई उत्पात होनेवाला है॥ १०॥✎ 93
पश्योत्पातान्नरव्याघ्र दिव्यान् भौमान् सदैहिकान्।
दारुणान् शंसतोऽदूराद्भयं नो बुद्धिमोहनम्॥ १०
भीमसेन! तुम तो मनुष्योंमें व्याघ्रके समान बलवान् हो; देखो तो सही—आकाशमें उल्कापातादि, पृथ्वीमें भूकम्पादि और शरीरोंमें रोगादि कितने भयंकर अपशकुन हो रहे हैं! इनसे इस बातकी सूचना मिलती है कि शीघ्र ही हमारी बुद्धिको मोहमें डालनेवाला कोई उत्पात होनेवाला है॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.14.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 147) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/14/10/