श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.13.7

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

तं भुक्तवन्तं विश्रान्तमासीनं सुखमासने।

प्रश्रयावनतो राजा प्राह तेषां१ च शृण्वताम्॥ ७

taṃ bhuktavantaṃ viśrāntamāsīnaṃ sukhamāsane|

praśrayāvanato rājā prāha teṣāṃ ca śṛṇvatām|| 7

अर्थ

जब वे भोजन एवं विश्राम करके सुखपूर्वक आसनपर बैठे थे तब युधिष्ठिरने विनयसे झुककर सबके सामने ही उनसे कहा॥ ७॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—स्वानां विशृण्वताम्।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 139)

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