गार्हपत्यादि अग्नियोंके द्वारा पर्णकुटीके साथ अपने पतिके मृतदेहको जलते देखकर बाहर खड़ी हुई साध्वी गान्धारी भी पतिका अनुगमन करती हुई उसी आगमें प्रवेश कर जायँगी॥ ५७॥✎ 92
दह्यमानेऽग्निभिर्देहे पत्युः पत्नी सहोटजे।
बहिः स्थिता पतिं साध्वी तमग्निमनुवेक्ष्यति॥ ५७
गार्हपत्यादि अग्नियोंके द्वारा पर्णकुटीके साथ अपने पतिके मृतदेहको जलते देखकर बाहर खड़ी हुई साध्वी गान्धारी भी पतिका अनुगमन करती हुई उसी आगमें प्रवेश कर जायँगी॥ ५७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.13.57 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 145) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/13/57/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)