श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.13.17

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

एवं गृहेषु सक्तानां प्रमत्तानां तदीहया।

अत्यक्रामदविज्ञातः कालः परमदुस्तरः॥ १७

evaṃ gṛheṣu saktānāṃ pramattānāṃ tadīhayā|

atyakrāmadavijñātaḥ kālaḥ paramadustaraḥ|| 17

अर्थ

इस प्रकार पाण्डव गृहस्थके काम-धंधोंमें रम गये और उन्हींके पीछे एक प्रकारसे यह बात भूल गये कि अनजानमें ही हमारा जीवन मृत्युकी ओर जा रहा है; अब देखते-देखते उनके सामने वह समय आ पहुँचा जिसे कोई टाल नहीं सकता॥ १७॥

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