वही यह बालक संसारमें परीक्षित्के नामसे प्रसिद्ध हुआ; क्योंकि वह समर्थ बालक गर्भमें जिस पुरुषका दर्शन पा चुका था, उसका स्मरण करता हुआ लोगोंमें उसीकी परीक्षा करता रहता था कि देखें इनमेंसे कौन-सा वह है॥ ३०॥
स एष लोके विख्यातः परीक्षिदिति यत्प्रभुः।
गर्भे दृष्टमनुध्यायन् परीक्षेत नरेष्विह॥ ३०
वही यह बालक संसारमें परीक्षित्के नामसे प्रसिद्ध हुआ; क्योंकि वह समर्थ बालक गर्भमें जिस पुरुषका दर्शन पा चुका था, उसका स्मरण करता हुआ लोगोंमें उसीकी परीक्षा करता रहता था कि देखें इनमेंसे कौन-सा वह है॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.12.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 138) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/12/30/