श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.12.27

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तक्षकादात्मनो मृत्युं द्विजपुत्रोपसर्जितात्।

प्रपत्स्यत उपश्रुत्य मुक्तसङ्गः पदं हरेः॥ २७

takṣakādātmano mṛtyuṃ dvijaputropasarjitāt|

prapatsyata upaśrutya muktasaṅgaḥ padaṃ hareḥ|| 27

अर्थ

ब्राह्मणकुमारके शापसे तक्षकके द्वारा अपनी मृत्यु सुनकर यह सबकी आसक्ति छोड़ देगा और भगवान्‌के चरणोंकी शरण लेगा॥ २७॥✎ 86

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #86 शब्दोंके बीचका स्थान: होगा॥१९॥ → होगा॥ १९॥

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