अपने बन्धुओंका शोक मिटानेके लिये और अपनी बहिन सुभद्राकी प्रसन्नताके लिये भगवान् श्रीकृष्ण कई महीनोंतक हस्तिनापुरमें ही रहे॥ ७॥✎ 7576
उषित्वा हास्तिनपुरे मासान् कतिपयान् हरिः।
सुहृदां च विशोकाय स्वसुश्च प्रियकाम्यया॥ ७
अपने बन्धुओंका शोक मिटानेके लिये और अपनी बहिन सुभद्राकी प्रसन्नताके लिये भगवान् श्रीकृष्ण कई महीनोंतक हस्तिनापुरमें ही रहे॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 1.10.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 126) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/1/10/7/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)