श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.10.5

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

नद्यः समुद्रा गिरयः सवनस्पतिवीरुधः।

फलन्त्योषधयः सर्वाः काममन्वृतु तस्य वै॥ ५

nadyaḥ samudrā girayaḥ savanaspativīrudhaḥ|

phalantyoṣadhayaḥ sarvāḥ kāmamanvṛtu tasya vai|| 5

अर्थ

नदियाँ, समुद्र, पर्वत, वनस्पति, लताएँ और ओषधियाँ प्रत्येक ऋतुमें यथेष्टरूपसे अपनी-अपनी वस्तुएँ राजाको देती थीं॥ ५॥

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