श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 1.10.20

प्रथम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

अन्योन्यमासीत्संजल्प उत्तमश्लोकचेतसाम्।

कौरवेन्द्रपुरस्त्रीणां सर्वश्रुतिमनोहरः॥ २०

anyonyamāsītsaṃjalpa uttamaślokacetasām|

kauravendrapurastrīṇāṃ sarvaśrutimanoharaḥ|| 20

अर्थ

हस्तिनापुरकी कुलीन रमणियाँ, जिनका चित्त भगवान् श्रीकृष्णमें रम गया था, आपसमें ऐसी बातें कर रही थीं, जो सबके कान और मनको आकृष्ट कर रही थीं॥ २०॥✎ 77 78

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #77 शब्दोंके बीचका स्थान: कोदेखती → को देखती
  • #78 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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